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साबरमती एक्सप्रेस को डेली चलाए जाने की मांग

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 कंटेंट राइटर हेमंत सागर। साबरमती एक्सप्रेस को डेली चलाए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। आपको बता दें रेल मंत्रालय से कई बार मांग रखी गई है कि ग्वालियर से साबरमती गुजरात को जाने वाली ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलती है। मुरैना से ग्वालियर और ग्वालियर से मुरैना आने वाजाने वाले यात्री इस ट्रेन को रोजाना चलाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन ग्वालियर और मुरैना के जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे।  _ साबरमती एक्सप्रेस 22547 को रोजाना ग्वालियर से मुरैना चलवाने मुरैना के नागरिक दिनों दिन मांग कर रहे हैं           , ग्वालियर से साबरमती को जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन शनिवार, रविवार और बुधवार को रात्रि 8:00 बजे कर 10 मिनट पर ग्वालियर से मुरैना की ओर चलती है।      इस गाड़ी के रोजाना चलाई जाने की मांग मुरैना नगर के निवासी काफी दिनों से उठा रहे हैं।      जानकारी के लिए बता दें की मुरैना से ग्वालियर छात्र एवं प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग रोजाना मुरैना से ग्वालियर अप डाउन करते हैं ।   अगर साबरमती ए...

बकरी पालन के लिए 01करोड़ का लोन, 40 प्रतिशत सब्सिडी

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 हेमंत सागर, कंटेंट राइटर  नेशनल बैंक ऑफ़ एग्रीकल्चर डेवलपमेंट अर्थात नाबार्ड कृषि व्यवसाय को बढ़ाना देने के लिए पशुपालक एवं किसानों को सब्सिडी दिलाने में सहायता करता है।    ऐसी योजना है जो बकरी पालन जिसमें पशुपालक एक करोड रुपए तक का लोन ले सकते हैं और 40% सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए यह सब्सिडी 50% है  बकरी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार अब किसानों को एक करोड रुपए का लोन देने जा रही है।     जिसमें 40 प्रतिशत सब्सिडी रहेगी यह किसानों के लिए फायदे का सौदा है।    अगर आपके पास 12 से लेकर 14 बीघा तक जमीन है तो आप मध्य प्रदेश की राज्य सरकार कि,     इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा सकते हैं मध्य प्रदेश सरकार बकरी बकरा पालन के लिए पशुपालकों को एक करोड रुपए तक का लोन देने जा रही है इस लोन की राशि में 40% सब्सिडी रहेगी अर्थात किसानों को काफी लाभ होने वाला है  कितनी कमाई कर सकते हैं किसान।  बकरी पालन व्यवसाय में लाभ साल दर साल बढ़ता चला जा रहा है।  सालाना डेढ़ लाख रुपए से₹200000 तक क...

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे नरेंद्र सिंह तोमर से मिलने

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 मुख्यमंत्री राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मिलने ग्वालियर पहुंचे, उनके साथ पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे।    दरअसल कॉंग्रेस की संविधान बचाओ रैली में शामिल होने ग्वालियर पहुंचे दिग्विजय सिंह रेसकोर्स रोड स्थित विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले पर पहुंचे। वह नरेंद्र सिंह तोमर के छोटे बेटे प्रबल प्रताप उर्फ रघु तोमर की होने वाली शादी को लेकर शुभकामनाएं देने पहुँचे।     इस दौरान नरेंद्र सिंह तोमर और दिग्विजय सिंह के बीच बंद कमरे में राजनीति से परे हटकर आधा घण्टे चाय पर चर्चा भी हुई। साथ ही पुराने किस्सों पर चर्चा के दौरान ठहाके भी लगाते हुए नजर आए। दिग्विजय सिंह के प्रबल प्रताप तोमर ने पैर छुए। वहीं दिग्विजय सिंह ने गले लगाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। मुलाकात को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि भतीजे की शादी हो रही है। आशीर्वाद देने आना ही पड़ेगा। आपको विस्तार से बता दें कि,  मध्य प्रदेश में कांग्रेस अब प्रदेश स्तरीय "संविधान बचाओ रैली" का आयोजन कर रही है। इसी कड़ी में आज ग...

किसानों को मिलेंगे 42 लाख रुपए

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 डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना किसानों को मिलेंगे 42 लाख       मध्य प्रदेश सरकार ने घटती गायों की संख्या को देखते हुए,    एक नई योजना किसानों के लिए लेकर आई है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना इसका पूरा नाम रखा गया है।    यह योजना उन किसानों के लिए काफी लाभदायक है जो पशुपालक है।   और देसी गाय रखना चाहते हैं, हालांकि शंकर गाय रखने की भी अनुमति रहेगी । ताकि दुग्ध उत्पादन अधिक से अधिक किया जा सके ।   मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश के किसानों को 42 लख रुपए किस्तों में देगी।    जिसमें 33% सब्सिडी भी रहेगी और 25% सब्सिडी रहेगी 33% सब्सिडी अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को दी जाएगी ।   जबकि 25% सब्सिडी अन्य वर्गों के किसानों को दी जाएगी  दुग्ध उत्पादन की बढ़ती मांग  यह योजना देश में घटते दुग्ध उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए लाई गई है।  आपको बता दें कि भारत में शुद्ध दूध का उत्पादन खपत के अनुपात में काफी कम है।   जिन किसानों के पास जमीन है उनको इस योजना का लाभ मिलेगा तीन एकड़ भूमि इस योजना का लाभ प्राप्त क...

रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई निशुल्क जल वितरण व्यवस्था

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कंटेंट राइटर, हेमंत सागर   ग्वालियर मुरैना रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई निशुल्क जल वितरण व्यवस्था। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मई और जून के महीने में बढ़ते तापमान को दृष्टिगत रखते हुए ।   मुरैना और ग्वालियर शहर के समाज सेवियों ने निशुल्क जल वितरण की व्यवस्था मुरैना और ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर की है ।   आपको बता दे की मुरैना और ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर करीब करीब 150 रेल गाड़ियां गुजरती है और अधिकतर रेलगाड़ियों  के स्टॉपेज भी ग्वालियर और मुरैना स्टेशन पर है।  बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर में पंजाबी परिषद ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर जल वितरण का काम संभाल रखा है ।    वही मुरैना रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से आने और जाने वाले यात्रियों के लिए निशुल्क जल वितरण की व्यवस्था भारत स्काउट गाइड एवं अन्य समाज सेवी संस्था ने संभाल रखा है।  गर्मियों में जहां ठंडा जल प्राप्त करना गरीब आदमी के बस की बात नहीं है।   और वह महंगा पानी खरीद नहीं सकता इसलिए गरीब एवं मध्यम परिवार के जब यात्री यहां से गुजरने वाली ट्रेन से यात्रा करते हैं।    तो उ...

ग्वालियर रेलवे स्टेशन का VIP लाउंज जल कर खाक

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   ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर अचानक आग लगने से VIP लाउंज जल कर खाक हो गया        ग्वालियर रेल्वे स्टेशन पर आग की लपटें उठने से अफरा तफरी मच गई। आग VIP लाउंज में लगी थी।     अचानक आग की लपटें उठती देख जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे कर्मचारियों ने आग पर काबू करने की कोशिशें शुरू कर दीं। इस बीच फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी गई। घटना की सूचना मिलते ही एक के बाद एक चार फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं।       आग ने जब तक विकराल रूपधारण कर लिया।  नगर निगम ग्वालियर के दमकल अमले ने तेजतर्रार कार्रवाई करते हुए कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है एसी में ब्लास्ट होने के बाद आग भड़की।     कुछ लोगों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की चिंगारी फर्नीचर पर गिरने के बाद आग ने विकराल रूप लिया।     हालांकि अग्निकांड की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। गनीमत रही कि घटना के दौरान कोई यात्री VIP लाउंज में मौजूद नहीं था।    अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल आग पर लगभग काबू पाया जा चुका है...

अछूतों को जब सड़क पर चलने का अधिकार नहीं था। तब अय्यंकाली ने दौड़ा दी थी बैलगाड़ी।

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हेमंत सागर, कंटेंट राइटर। वर्ष 1893 जब केरल में अछूत समुदाय को सड़क पर चलने का अधिकार नहीं था। तब अय्यंकाली ने दो हट्टे कट्टे बैलों को सजा कर और बैलगाड़ी को राजा महाराजाओं की तरह बनाकर उस पर सवारी कर नए बने पुल पर दौड़ा दिया था ।   अय्यंकाली के इस क्रांतिकारी क़दम से पूरे केरल राज्य में हलचल मच गई। जातिवादी लोगों की छाती पर सांप लोट गए, क्योंकि साल 1893 में जब केरल राज्य में छुआछूत चरम पर थी।  दलितों को सड़क पर चलने का अधिकार नहीं था।   अय्यंकाली उस समय समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव अस्पृश्यता के खिलाफ लड़ रहे थे । वह एक समाज सुधारक थे, जिन्होंने दलित वर्ग के लोगों के अधिकार के लिए काम किया।  अय्यंकाली ने बैलगाड़ी इसलिए दौड़ाई ताकि वह दिखा सके कि, दलित वर्ग के लोग भी ऊंची जाति के लोगों की तरह सवारी कर सकते हैं।  उस समय दलित वर्ग के लोगों को सवारी करने का अधिकार नहीं था। उन्हें पैदल ही चलना पड़ता था।   अय्यंकाली ने इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और बैलगाड़ी दौड़कर दिखाई की दलित वर्ग के लोग भी समानता के अधिकार के हकदार हैं। अय्यंकाली ने  जातिगत भेदभा...