तुम कांवड़ लेने मत जाना और हो गई FIR

 
कंटेंट राइटर हेमंत सागर।


उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में एक शिक्षक द्वारा कावड़ यात्रा पर ऐसी कविता पड़ी कि उस पर उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा एफआईआर दर्ज कर दी गई। 


आखिर ऐसा क्या था इस कविता में जो शिक्षक को भारी पड़ गया 

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में एक विद्यालय में पदस्थ डॉक्टर रजनीश गंगवार ने बच्चों की प्रार्थना सभा में लाउडस्पीकर पर माइक के सहारे कावड़ यात्रा पर एक कविता पढ़ना शुरू कर दिया हाथ में मोबाइल था और दूसरे हाथ में माइक जब शिक्षक गंगवार कविता कांवड़ लेने मत जाना शीर्षक से कविता पढ़ना शुरू कर रहे थे।

    तभी किसी ने एक वीडियो बना लिया और यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया ।

 फिर क्या था उत्तर प्रदेश की सरकार ने आनन फानन में शिक्षक पर FIR कर दी, और दलील दी कि इस कविता में कांवड़ यात्रा विरोध संदर्भ झलक रहा है।

 शिक्षक से कावड़ पर लिखी कविता पर माफी मांगने के लिए कहा गया, लेकिन शिक्षक ने साफ-साफ कह दिया कि मैं माफी नहीं मांगूंगा क्योंकि कविता में ऐसा कुछ है ही नहीं जिसके लिए माफी मांगी जाए।

अब सोशल मीडिया पर यह बहस का मुद्दा बन गया कि शिक्षक सही है या उत्तर प्रदेश की सरकार।

 जितनी भी सोशल मीडिया पर पोस्ट आई है उनमें 95% पोस्ट और कमेंट शिक्षक के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।

 कमेंट करने वालों ने लिखा है कि कावड़ से पहले शिक्षा बच्चों के लिए जरूरी है। क्योंकि यह कविता संपूर्ण जनमानस के लिए नहीं लिखी गई थी। सिर्फ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सुनाई जा रही थी जो की 15 वर्ष से कम उम्र के थे।

   शिक्षक का कहना है कि कावड़ यात्रा के दौरान बच्चे नशे की चपेट में आते हैं और उनका शरीर थक जाता है और वह बीमार हो जाते हैं इसकी वजह से 5 से लेकर 15 दिन बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है। जो नहीं होनी चाहिए।

 अर्थात कांवड़ यात्रा लाना 10 से लेकर 15 दिन समय की बर्बादी है यह सिर्फ छात्रों के लिए डॉ. रजनीश गंगवार ने कहा है। सरकार इसका गलत अर्थ निकाल कर चल रही है कि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है 

 लेकिन दूसरी तरफ यह देखा जाए की शिक्षक गंगवार सिर्फ कांवड़ लेने मत जाना बच्चों से कह रहे हैं अन्य से नहीं।   अब सोशल मीडिया पर सरकार की किरकिरी हो रही है कि, एक शिक्षक के ऊपर FIR दर्ज कर दी गई। FIR दर्ज करना अर्थात एक भले मानस के लिए बहुत बड़ा कलंक होता है। सरकार को FIR दर्ज करने से पहले शिक्षक की प्रेस्टीज का ध्यान रखना चाहिए था ।

 नोटिस भी दिया जा सकता था । शिक्षा विभाग के द्वारा उन्हें डाटा भी जा सकता था। लेकिन इतना ना करते हुए एक बड़ी कानूनी कार्रवाई FIR सरकार के द्वारा पुलिस थाने में कर दी गई । अब शिक्षक को थाने में जाना होगा और अपनी जमानत का आवेदन लगाना होगा।  कोर्ट कचहरी पर तारीख लगेगी वह अलग । इससे शिक्षक की जो शैक्षणिक दिनचर्या है वह भी बिगड़ेगी।

अब हम आपको जनता द्वारा दिए कमेंट पढ़ाते हैं।






कंटेंट राइटर हेमंत सागर 

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