SAIYAARA मूवी देख, फूट फूट कर रो रहे युवा।

 


सैयारा 16 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म ने थिएटर और मल्टीप्लेक्स में धूम मचाई हुई है युवा थिएटर में फूट फूट कर रो रहे हैं। इस तरह के वीडियो, क्लिप सोशल मीडिया पर जिज्ञासा पैदा कर रहे हैं आखिर क्या वजह है,क्यों रो रहे हैं।

फिल्म में एक युवा कलाकार आहान पांडे और अनीता पड्डा फ्रेस चेहरे लिए, बड़े पर्दे पर दिखाई दे रहे हैं।

 युवाओं को उनकी प्रेम कहानी में, अपनी प्रेम कहानी दिखाई दे रही है। उनके ब्रेकअप में, खुद पर बीता हुआ ब्रेकअप दिखाई दे रहा है।  भारत में अक्सर ब्रेकअप हो जाते हैं। और कुछ युवा इस ब्रेकअप को झेल नहीं पाते । झेल नहीं पाने वाले युवाओं को में रखते हुए। यह फिल्म बनाई है।


  यह मूवी  मेट्रो शहरों के ब्रेकअप को युवाओं को दिखा रही है। जहां पर धर्म और जाति से उठकर प्रेम किया जाता है। और यह प्रेम सफल नहीं होता है, तब यह इमोशनल धक्का पहुंचता है।

 लेकिन भारतीय परिदृश्य में मेट्रो शहर से नीचे के शहरों की ओर आए तो ब्रेकअप के मामले के विषय अलग-अलग होते हैं ।

 हालांकि युवा सिर्फ मेट्रो शहर मुंबई के युवाओं के बीच होने वाले रोमांस को लेकर एक तरफ गदगद है, तो वहीं दूसरी तरफ ब्रेकअप को लेकर खुद इमोशनल हो रहा है और थिएटर में कहीं आंसू बहा रहा है, तो कहीं कपड़े फाड़ रहा है।    सैयारा ने इस समय 200 करोड़ का कारोबार करके हाउसफुल 5, रेड 2, और "सितारे जमीन पर" फिल्म को पीछे छोड़ दिया है। आमिर खान की फिल्म जब भी रिलीज होती थी, तब सभी रिकॉर्ड तोड़ देती थी। लेकिन इस बार सैयारा से पीछे रह गई। 


    कुछ फिल्म समीक्षकों का कहना है कि यह फिल्म उन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। जो प्रेम को हल्के में लेते हैं।मौज मस्ती में लेते हैं। चार-चार अफेयर करते हैं। उनको इस फिल्म से सीख लेना चाहिए, कि सच्चा प्रेम इंसान को इंसान से करना चाहिए। धोखेबाजी से दूर।

 मोहित सूरी ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया है और 50 से 60 करोड रुपए इसको बनाने में खर्च हुआ है। फिल्मी दुनिया में इस तरह की आमदनी 50 करोड रुपए लगाकर सीधे 200 करोड रुपए, 10 दिन के अंदर काम लेना। नए युवाओं को आकर्षित करती है। हालांकि युवा के अलावा कोई भी इस फिल्म को देखने के लिए नहीं जा रहा है।

अब देखना यह है कि, यह सैयारा मूवी रक्षाबंधन तक मल्टीप्लेक्स में टिक पाती है या नहीं। अगर रक्षाबंधन से पहले इसकी स्पीड कमजोर पड़ती नजर आएगी। तो थिएटर और मल्टीप्लेक्स वाले इस मूवी को हटाते देर नहीं करेंगे। 

 मल्टीप्लेक्स में ₹300 से लेकर ₹400 तक के टिकट चार्ज हैं । पॉपकॉर्न का खर्चा ₹100 अलग है अर्थात अगर कोई कपल इस मूवी को देखने के लिए जाता है तो उसकी जेब ₹1000 से ढीली हो जाएगी। कोई जमाना था जब 40 से ₹50 के टिकट आया करते थे और ₹200 में दो लोग मूवी का आनंद पॉपकॉर्न कोल्ड ड्रिंक के साथ लिया करते थे। लेकिन भौतिकवादी युग में परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है अब दर्शक सिमट कर रह गए हैं।

एक ऐसा भी समय था जब लोअर क्लास, लोअर मिडल क्लास, मिडल कैटेगरी के लोग मूवी देखने के लिए रिलीज डेट वाले दिन थिएटर की  खिड़की पर लाइन लगाकर पहुंच जाते थे। लेकिन अब वह कामकाजी युवा थिएटर की खिड़की से गायब। अब वहीं युवा थिएटर मल्टीप्लेक्स में आंसू बहा रहा जो घर से संपन्न है, जिसे कमाने घर से नहीं निकलना।

दर्शकों में सिर्फ पैसे वालों के बच्चे। कॉलेज जाने वाले बच्चे। अब मल्टीप्लेक्स में दिखाई देते हैं। और मल्टीप्लेक्स की सीट सिमट कर एक चौथाई भर पा रही है। कभी-कभी मल्टीप्लेक्स में दो से चार लोग ही मूवी को देखते हुए मिलते हैं। मल्टीप्लेक्स भी 100 सीट से लेकर 150 सीट के बन रहे हैं । एक जमाना था जब 400 से 500 सीट के थिएटर बना करते थे और हाउसफुल जाते थे । लेकिन अब समय बदल चुका है। अब लोअर कैटेगरी युवा थिएटर से गायब है। अब वह मूवी देखने मल्टीप्लेक्स में नहीं जाता । मोबाइल पर ही एंटरटेनमेंट कर लेता है।

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