फार्मा कंपनी की नौकरी छोड़, किया रंगीन मछली पालन कमाती है 3 लाख रुपए

 सफलता की कहानी



फार्मासिस्ट से मत्स्य उद्यमी बनीं लवली गुप्ता


 भोपाल की रहने वाली श्रीमती लवली गुप्ता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब संकल्प मजबूत हो और दिशा सही हो, तो कोई भी राह असंभव नहीं होती। पेशे से फार्मासिस्ट रहीं लवली जी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते फार्मा कंपनी की नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय लिया, लेकिन अपने आत्मबल और नई सोच से उन्होंने स्वरोजगार की राह पकड़ी।


 अपने बच्चे की बीमारी के दौरान घर के करीब रहकर कोई कार्य प्रारंभ करने की सोच ने उन्हें मत्स्य पालन की ओर प्रेरित किया। मछली विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लिया और अनुदान प्राप्त कर रंगीन मछलियों की यूनिट स्थापित की।


 अपने पति के सहयोग से उन्होंने भोपाल और आसपास के जिलों में रंगीन मछलियों की बिक्री और एक्वेरियम की स्थापना का कार्य प्रारंभ किया। आज उनकी इकाई से उन्हें लगभग ₹1 लाख प्रति माह की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। यह सिर्फ उनकी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उन सात लोगों की भी है जिन्हें उन्होंने इस कार्य से प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है। इसके अतिरिक्त विक्रय केंद्रों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं।


 लवली गुप्ता का यह सफर न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसे सरकारी कार्यक्रम किस प्रकार से आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। श्रीमती लवली ने मत्स्य विभाग, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं था।

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