साइकिल से सीखिए कोई काम एक दम नहीं होता

 आपके बचपन की बहुत सारी यादों को हम दोबारा से ताज़ा करते हैं, और जब आपके सामने अपने बचपन की यादें आएंगी, तो उसमें साइकिल आपको ज़रूर नज़र आएगी। आपने जब पहली बार साइकिल चलाना सीखा होगा, तो वो पल शायद आपके लिए बड़ा स्पेशल रहा होगा। आपको आज तक याद होगा। कई लोगों के लिए तो यह रिश्ता अब टूट चुका है।


मानव इतिहास में साइकिल को एक क्रांतिकारी आविष्कार माना जाता है, क्योंकि साइकिल ने ही सबसे पहले इंसान को पहिए पर सफल सफर करने की आज़ादी दी थी। यह इंसान के पैरों में पंख लगने जैसा था। उस समय यह एक चमत्कार जैसा दिखता था।
हर पीढ़ी का साइकिल से अपना एक इमोशनल रिश्ता रहा है। पीढ़ियाँ बदलती गईं और साइकिल का स्वरूप भी बदलता चला गया। अगर हम भारत की बात करें, तो भारत में साइकिल कई ऐतिहासिक पलों की साक्षी रही है। वर्ष 1963 में जब इसरो ने अपना पहला रॉकेट लॉन्च किया था, तब इसरो के वैज्ञानिक इस रॉकेट को साइकिल पर रखकर ही लॉन्चिंग पैड तक लेकर गए थे।
आप भारत में साइकिल की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से भी लगा सकते हैं कि साइकिल को फिल्मी पर्दे पर भी बहुत मौके मिले हैं। आपने फिल्मी पर्दे पर साइकिल को ज़रूर देखा होगा। साइकिल की फिल्मी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। ब्लैक एंड वाइट फिल्मों के ज़माने से लेकर अब तक बहुत सी हिंदी फिल्मों में साइकिल को शामिल किया गया है।
जिस प्रकार से आज के हीरो लेटेस्ट गाड़ी या बाइक चलाते हैं, उस ज़माने में नायक साइकिल चलाता था। सबसे पहले 1941 में आई फिल्म ख़ज़ांची में साइकिल पर गाना फिल्माया गया था। फिर 1957 में फिल्म पेइंग गेस्ट और 1971 में आई फिल्म तेरे मेरे सपने में भी साइकिल पर शानदार गाने फिल्माए गए थे। देव आनंद का वह गाना आज भी मशहूर है।
समय के साथ-साथ साइकिल का स्वरूप भी बदलता चला गया। पहली साइकिल लकड़ी की बनी थी, लेकिन आज के दौर में इलेक्ट्रिक साइकिल भी बाज़ार में आ गई हैं। एक समय था जब साइकिल एक लग्ज़री हुआ करती थी—सबके पास नहीं होती थी। उसकी क़ीमत इतनी ज़्यादा थी कि सिर्फ़ अमीर लोग ही साइकिल खरीद पाते थे। फिर वह वक्त भी आया जब साइकिल आम आदमी की ज़रूरत बन गई और अब साइकिल लग्ज़री भी है और आम आदमी की सवारी भी।
आज के बाज़ार में साइकिल ₹1000 में भी मिल जाती है, जबकि दुनिया की सबसे महंगी साइकिल इस समय 24 कैरेट गोल्ड की बनी हुई है, जिसकी कीमत ₹8.5 करोड़ है।
साइकिल के पहिए समय के चक्र की तरह होते हैं। जब साइकिल का पहिया घूमता है, तब आप अलग-अलग रास्तों पर सफर करते हुए अपनी मंज़िल तक पहुंचते हैं। और ठीक उसी तरह वक्त का पहिया भी घूमता है। आप अपनी ज़िंदगी में अलग-अलग सफर तय करते हुए नए मुक़ाम हासिल करते हैं।
साइकिल के पहिए हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और साइकिल को मेहनत और परिश्रम से भी जोड़कर देखा जाता है। जब गाड़ी चलती है तो ईंधन जलता है, लेकिन जब साइकिल चलती है तो पसीना बहता है। और यही कारण है कि साइकिल को एक क्रांति भी माना जाता है।
साइकिल के पैडल बताते हैं:
रुकोगे तो गिरोगे, चलोगे तो पहुंचोगे।
इसलिए साइकिल में एक जीवन पाठ भी छिपा है।

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