रामकृष्ण आश्रम के सचिव सुप्रदीप्तानंद को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 2 करोड़ 52 लाख रुपए
डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपए ठगने का खेल लगातार देश भर में जारी है।
ताजा घटनाक्रम मध्य प्रदेश ग्वालियर से निकल कर आया है।
जहां एक संत पुरुष सुप्रदीप्तानंद
से दो करोड़ 52 लाख रुपए डिजिटल अरेस्ट कर 10 बार में, बारों बारी से खातों में ट्रान्सफर करवाए गए।
रामकृष्ण आश्रम के सचिव सुप्रदीप्तानंद अपनी फर्जी गिरफ्तारी से इतना घबराए कि, उन्होंने धड़ाधड़ 2 करोड़ 52 लाख की राशि ट्रांसफर कर दी।
सबसे बड़ी जटिल बात यह है कि, ठगों राशि अपने खातों में ट्रान्सफर न कराते हुए बिटकॉइन क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से प्राप्त की।
जिसको रिकवर कर पन पुलिस के लिए सबसे बड़ी परेशानी है।
राजनैतिक गलियारों में चर्चा एक विषय और उबाल मार रहा है की करोड़ों की राशि एक संत पुरुष के पास आई कहां से इसका जवाब भी देना है
अब आपको खबर के विस्तार में ले चलते हैं।
ग्वालियर शहर के बीचो-बीच करीब 5 एकड़ में फैला रामकृष्ण-मिशन आश्रम है।
यहां के सचिव सुप्रदिप्तानंद से 26 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के जरिये ठग 2 करोड़ 52 लाख की रकम दुबई के खातों में भी ट्रांसफर कराते रहे
रकम को ट्रांसफर करने के लिए क्रिप्टो करेंसी के हिडन ई-वॉलेट का इस्तमाल हुआ। जिसे ट्रैक करना SIT के लिए काफी कठिन है,फिलहाल मामले में एसआईटी (SIT) को ठगों की तलाश है।
2 करोड़ 52 लाख रुपये के ठगी मामले में रामकृष्ण-मिशन आश्रम के सचिव सुप्रदिप्तानंद को 26 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की बड़ी वारदात की गई थी।
ठग ने खुद को नागपुर पुलिस अधिकारी बताकर फोन किया था। इस दौरान ठगों ने जेट एयरवेज के संस्थापक। " नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग " मामले में उन्हें शामिल बताया।
सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट भी बनाई। इसके साथ CJI के जरिये जारी गिरफ्तारी वारंट भी दिखाए।
इसके बाद वह ठगों के जाल में फंसते चले गए और एक ही बैंक खाते में एक करोड़ 30 लाख रुपए की सबसे बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद मणिपुर, केरल, उत्तराखंड, असम, मध्य प्रदेश, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली के बैंक खातों में भी पैसा ट्रांसफर किया।
इस तरह 16 बार में 10 बैंक खातों में सचिव ने 2 करोड़ 52 लाख रुपए की रकम ट्रांसफर कर दी। रकम आने के बाद आशंका है की जालसाजों ने यह पूरा पैसा 100 से ज्यादा बैंक खातों में कन्वर्ट किया है।
जिनमे दुबई के बैंक खाते भी शामिल है। जिसके लिए क्रिप्टो करेंसी का उपयोग किया गया। फिलहाल SIT,साइबर क्राइम बिंग और राज्य साइबर सेल की टीम जाँच में जुटी हुई है।
धर्मवीर सिंह यादव- SSP ग्वालियर
आपको बता दे कि शासन-प्रशासन द्वारा लोगों को साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट के बारे में जागरूक करने के बाद भी लोग इसके शिकार हो रहे हैं। बदमाश पढ़ें लिखे और जानकार लोगों को भी अपने झांसे में ले लेते है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई केस नहीं होता है। लोगों को अनजान नंबर से फोन आने पर परिजन और पुलिस से संपर्क करना चाहिए, तभी डिजिटल अरेस्ट से बचा जा सकता।
कंटेंट राइटर हेमन्त सागर



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