बीएन राव मूर्ति स्थापना के लिए भूमि पूजन।
बीएन राव मूर्ति स्थापना के लिए भूमि पूजन।
ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद के बीच बीएन राव की मूर्ति स्थापना के लिए भूमि पूजन: एक नया राजनीतिक मोड़
ग्वालियर, 6 सितंबर 2025 मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर चल रहा विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच परिसर में अंबेडकर की मूर्ति लगाने की मांग पर चले आंदोलन और विरोध के बीच, सामाजिक न्याय रक्षा मोर्चा ने भारतीय संविधान के मुख्य सलाहकार सर बेनेगल नरसिम्हा राव (बीएन राव) की मूर्ति स्थापना के लिए ठाठीपुर स्थित नेहरू पार्क में भूमि पूजन कर दिया। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ाने वाली है, बल्कि संविधान निर्माण की ऐतिहासिक भूमिकाओं को लेकर भी बहस छेड़ रही है।
ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना का विवाद फरवरी 2025 से चला आ रहा है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत के दौरे के दौरान वकीलों ने ज्ञापन सौंपा था, मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक सहमति दी, और पीडब्ल्यूडी विभाग ने फाउंडेशन भी तैयार कर लिया।बार एसोसिएशन के एक वर्ग ने इसका विरोध किया, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि न्याय केवल तिरंगे के अधीन होना चाहिए। इस विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया, जहां कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण और आजाद समाज पार्टी जैसे संगठन डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा लगाई जाने की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच, सामाजिक न्याय रक्षा मोर्चा ने बीएन राव की भूमिका को उजागर करने का अभियान चलाया। मोर्चा का दावा है कि संविधान निर्माण में बीएन राव का योगदान अहम था, जिन्होंने 375 अनुच्छेदों में से 243 आर्टिकल ड्राफ्ट किए। वे संविधान सभा के सलाहकार के रूप में जाने जाते हैं, और अंबेडकर समिति ने उनके ड्राफ्ट के आधार पर काम किया। मोर्चा के संयोजक राजेंद्र पांडे और अनिल मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि इतिहास के अन्य शिल्पकारों को सम्मान देना है। उन्होंने घोषणा की कि बीएन राव की प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची होगी, जो ग्वालियर को नई पहचान देगी। यदि प्रशासन से जगह नहीं मिली, तो जनसहयोग से निजी भूमि खरीदकर स्थापना की जाएगी।
शनिवार को नेहरू पार्क में आयोजित भूमि पूजन में रक्षक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पूजा-अर्चना की। आनन-फानन में भारी पुलिस बल पहुंचा, लेकिन तब तक कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की चेतावनी दी, जबकि मोर्चा नेताओं ने कहा कि जल्द ही मूर्ति स्थापना होगी। इस घटना ने अंबेडकर समर्थकों में आक्रोश पैदा कर दिया, जो इसे 'आंबेडकर बनाम बीएन राव' का रूप मान रहे हैं।
पुलिस ने कई हैंडल्स को नोटिस जारी किए हैं। ग्वालियर एसएसपी ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बरकरार है। अंबेडकर को संविधान का मुख्य शिल्पकार माना जाता है, लेकिन बीएन राव जैसे अन्य योगदानों को भी मान्यता मिलनी चाहिए। फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने शांति बैठक बुलाई है, ताकि विवाद और न फैले।
ग्वालियर की इस घटना ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय की बहस को नई दिशा दी है।
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