जिस विभाग में रिज़र्वेशन नहीं, वहां रिप्रजेंटेशन भी नहीं होगा।
जिस विभाग में रिजर्वेशन नहीं, वहां रिप्रजेंटेशन भी नहीं, यह बात एमपी के पूर्व सीजे कैत ने कही
- मैं अपनी बात नहीं कर रहा, ध्यान रखना कि मेरे लिए भी ये हुआ है। और मेरे लिए जो कुछ हुआ है उसको मैं ज्यादा कम्पलेन नहीं करता। क्योंकि, बोलने वाला और समाज के लिए करने वाले को कोई पसंद नहीं करता। खासकर जिनके हाथ में सिस्टम है। आपके हाथ में सिस्टम नहीं हैं। आप चाहे जितनी चर्चा करो,कि बहुत अच्छा किया ये किया वो किया। लेकिन जिनको डिसाइड करना है उनके लिए जितने चर्चें बनते हैं उतना उल्टा काम होता है। लेकिन, उसकी हमने परवाह नहीं की। जो मैंने किया मैं प्राउड फील करता हूं।
मप्र हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत रविवार को भोपाल के समन्वय भवन में हुए दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज एवं आदिवासी संगठनों (DOMA) के परिसंघ के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसमें परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदित राज, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और परिसंघ के प्रदेश अध्यक्ष एआर सिंह मौजूद थे।
पूर्व चीफ जस्टिस ने कॉलेजियम सिस्टम पर भी सवाल उठाए कहा- दलित, आदिवासी, पिछड़ा 90% से ऊपर, फिर भी एससी-एसटी से कोई हाईकोर्ट जज नहीं बना
यह कोलेजियम सिस्टम की बेइमानी है
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, आपका मप्र हाईकोर्ट 1956 का हाईकोर्ट है। क्या एडवोकेट नहीं थे, कैंडिडेट नहीं थे, सब थे।
लेकिन ये बेईमानी है, कॉलेजियम सिस्टम की बेईमानी है। कॉलेजियम में कोई खराबी नहीं, कोई सिस्टम तभी परफेक्ट हो सकता है जब आप उसमें एक लाइन बनाएंगे कि इतने प्रतिशत इनका भी रिप्रिजेंटेशन होगा। तभी लोग पिछड़े लोग आ पाएंगे।।

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