मध्य प्रदेश में 7498 पद सहायक प्राध्यापक के खाली

 कंटेंट राइटर हेमंत सागर 


7498 पद सहायक प्राध्यापक के खाली 

मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा की हालत खस्ता बताई जा रही है। जहां छात्रों से फीस तो पूरी वसूल कर ली जाती है लेकिन पढ़ने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के पास प्रोफेसर नहीं है अतिथि शिक्षकों से कम चलाया जा रहा है आपको बता दें की नॉन एकेडमिक कर्मचारियों की संख्या प्रोफेसर से कई गुना अधिक है और अधिकतर परमानेंट जॉब कर रहे हैं लेकिन वही शिक्षा की बात करें तो उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के कॉलेज में और विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षकों से काम चला रहा है। 


उच्च शिक्षा विभाग में 7498 सहायक प्राध्यापक के पद खाली पड़े हुए हैं वहीं 4 015 अतिथि विद्वान इनकी कमी को पूरा कर रहे हैं।

यह जानकारी विधानसभा में पूछे गए प्रश्न से निकलकर सामने आई है आपको बता दें कि जौरा विधानसभा से विधायक पंकज उपाध्याय और विधायक संजय उइके ने विधानसभा में प्रश्न लगाकर पूछा था कि प्रदेश के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद कितने खाली पड़े हुए हैं।

  विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री इंद्र परमार ने जवाब देते हुए बताया की 7498 पद सहायक प्राध्यापक के महाविद्यालय में खाली पड़े हुए हैं।

 वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की बात करें तो 793 पद खाली पड़े हुए हैं।  खाली पड़े हुए पद के पीछे क्या कारण है यह स्पष्ट नहीं हो सका है ।

   लेकिन जानकारों का कहना है कि, यह अधिकतर पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों से भरे जाने हैं।  लेकिन राज्य सरकार इन पदों को भरने में देरी कर रही है।

वही एक दूसरे प्रश्न के जवाब में ग्रंथपाल के पद कितने खाली पड़े हुए हैं इसका जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंद्र परमार ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में कुल 346 पद खाली पड़े हुए हैं। 

लगातार होती है मांग़ लेकिन नहीं भरे जाते। 

प्रदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी लगातार इन पदों को भरने की मांग करते हैं। लेकिन राज्य सरकार हर बार इनको टहला देती है। अधिकतर पद अनुसूचित जाति एवं जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के बताए जा रहे हैं। जिनका बैकलॉग भरा जाना जरूरी है। लेकिन राज्य सरकार ऐसा नहीं कर रही है। किसी भी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में अगर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के प्राध्यापक के आंकड़े निकाले जाएं, तो यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। अभी तक राज्य सरकार आरक्षण के नियमों का पालन ठीक ढंग से नहीं कर पाई।

 अगर आरक्षण के नियम का पालन ठीक ढंग से कर दिया जाए । तो यह पद शीघ्र भर जाएंगे।  लेकिन राज्य सरकार इसमें किसी प्रकार की कोई रुचि नहीं ले रही है


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